भीगे कागज की तरह
कर दिया तूने जिन्दगी को
न लिखने के
काबिल छोड़ा न जलने के…
*******
मै फिर से गिरूंगा ये ग़लतफ़हमी दूर कर लो…
वो दिल की गलती थी की हम लडखडा से गए थे…
*******
आँखें भिगोने लगी है अब तेरी बातें,
काश ..
तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा होता..
*******
तुझे शिकायत है कि , मुझे बदल दिया है वक्त ने __ !
कभी खुद से भी तो सवाल कर क्या तू वही है…..?
*******
वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा,
मसला फूल का है फूल किधर जाएगा।
*******
एक ही चेहरे की अहमियत हर एक नजर में अलग सी क्यूँ है,,
उसी चेहरे पर कोई खफा तो कोई फिदा सा क्यूँ है,,,,,,
*******
बहुत मुश्किल से करता हूँ, तेरी यादों का कारोबार…
मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है.!!!
*******
जो न देते थे जवाब , उनके सलाम आने लगे…
वक़्त बदला तो, मेरे नीम पे आम आने लगे…
*******
दिल कर बैठा
बच्चो जैसी ज़िद
तुम सामने हो
तब ही मनाये ईद !!!
आसिम !!
*******
कितना अजीब है ये फलसफा जिंदगी का ;
दूरियां सिखाती है की नज़दीकियां क्या होती हैं ..
*******
कुछ अधूरे ख़्वाबों से सुलह कर लेता हूँ,
बस इस तरह रात से सुबह कर लेता हूँ।
*******
नींद भी नीलाम हो जाती हैं दिलों की महफ़िल में जनाब,
किसी को भूल कर सो जाना इतना आसान नहीं होता…
*******
न जाने किसने चलाया ये तोहफे देने का रिवाज़.!
गरीब आदमी मिलने-जुलने से डरता है साहब.!!
*******
हास्य-व्यंग्य की पराकाष्ठा :
तुम तो ऐसे उदास बैठे हो,
जैसे बीबी के पास बैठे हो…।।।
*******
मुझसे झूठ की उम्मीद ना करो
तुम।,
मैं आईना हूं , सबह का अखबार नहीं….
*******
धुंआ दर्द बयाँ करता है,,और राख कहानियां छोड़ जाती है,
कुछ लोगों की बातों में भी दम नही होता,
कुछ लोंगो की खामोशियाँ भी निशानियां छोड़ जाती है।
*******
ख़्वाब रूठे हैं मगर हौसले अभी ज़िंदा हैं…
हम वो शख्स हैं जिससे मुश्किलें भी शर्मिंदा हैं।
*******
चख लिया इश्क, इत्तेफाक से जिसने,
जुबां पर आज भी उनके दर्द के छाले है…
*******
वो इक मज़ाक़ जिसे लोग इश्क़ कहते हैं…
मैं उस मज़ाक़ का जुर्माना भर के आया हूँ।
*******
मौसम का ग़ुरूर तो देखो!!!
तुमसे मिल कर आया हो जैसे….
*******
लगता है हम ही अकेले समझदार है,
हर बात हमें ही समझाई जा रही है!!
*******
कुछ अजब हाल है इन दिनों तबियत का…..
ख़ुशी ख़ुशी न लगे और ग़म बुरा न लगे…..
*******
बैठे हैं बड़ी फुरसत से,
तेरी फुरसत के इंतज़ार मे..!!!
*******
जब दिल..
ना लग रहा..
हो कहीं..
तब समझिये..
कि दिल लग..
गया है कहीं..!!
*******
दर्द आँखों से निकला, तो सब ने कहा कायर है ये,
दर्द अल्फ़ाज़ में क्या ढला, सबने कहा शायर है ये।
*******
“अपनी वफ़ा का इतना दावा ना किया कर,
मैंने रूह को जिस्म से बेवफाई करते देखा है !!”
*******
मैंने कुछ लफ़्ज लिखे है लहरों पर,
जब दरिया तेरे शहर से गुजरे पढ़ लेना….
*******
मेरी झोली में कुछ दोस्त और कुछ रिश्ते हैं ,
शुक्र ए मेरे मालिक, उनमे कुछ आप जैसे फ़रिश्ते हैं.!
*******
तुमको मिल ही गया
कोई बेहतर
मुझसे !
मुझको भी मिल गया
कोई बेहतर
तुमसे !
पर कभी कभी दिल को यूँ भी लगता है …
हम जो इक दूसरे को मिल जाते
तो यक़ीनन वो होता बेहतर
सबसे !
*******
कीमतें गिर जाती हैं खुद की अक्सर,
किसी को कीमती बनाने में।
*******
टूटें तो बड़े चुभते हैं…
क्या काँच.. क्या ख़्वाब.. क्या रिश्ते………
*******
रस्म-ए-उल्फत ही इजाज़त नहीं देती वरना…
हम तुम्हें इस तरह भूलें ,
के तुम भी याद करो।
*******
गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों में,
जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारो में|
*******
ये इत्र की शीशियां बेकार ही इतराती है खुद पर,
रिश्ते तो आप जैसे लोगो से महकते है ….
*******
रुसवाई का डर है… या अंधेरों से मोहब्बत,
अब चाँद को मैं आँगन में उतरने नहीं देता।
*******
आज लफ्जों को मैने शाम की चाय पे बुलाया है,
बन गयी बात तो ग़ज़ल भी हो सकती है..!!
*******
कभी तुम मुझे अपना तो कभी गैर कहते गये,,,,
देखो मेरी नादानी, हम सिर्फ तुम्हे अपना कहते गये…..!
*******
चमचों की फितरत को अभी तू,
समझा ही कहाँ है ऐ बर्तन….
ये बने ही तुझे खाली करने के लिए हैं।
*******
न जाने ज़िन्दगी का, ये कौन सा दौर है,
इंसान खामोश है, और
ऑनलाइन कितना शोर है।
*******
जो-जो बातें पी गया था मैं..
वो सारी बातें खा गयीं मुझे…
*******
यह चादर सुख की मौला क्यों सदा छोटी बनाता है ,
सिरा कोई भी थामो दूसरा कुछ छूट जाता है।
*******
चाहे कसूर किसीका भी हो,
लेकिन रिश्ते में आंसू हमेशा बेकसूर के ही बहते है..!!
*******
तेरी दोस्ती एक नशा है,
तभी तो सारी दुनियां हमसे खफा है,
ना करो हमसे इतनी दोस्ती,
कि दिल हमसे पूछे तेरी धड़कन कहाँ है…
*******
लफ्ज मै कितने भी खूबसूरत लिख दूँ…
निखार तो तब आता है जब आप दिल से उफ्फ करते है..
*******
जो नहीं है हमारे पास वो ख्वाब हैं,
पर जो है हमारे पास वो लाजवाब हैं…
*******
“ज़िन्दगी’……….”जीनी” है तो “तकलीफ’ तो “होगी” ही…!!
वरना,
“मरने” के बाद तो “जलने” का भी “एहसास” नहीं होता साहब…!!
*******
“ना राख उड़ती है ….. ना धुआँ उठता है….
कुछ रिश्ते यूँ चुपचाप जला करते हैं…!!!
*******
हर मर्ज़ का इलाज नहीं दवाखाने में…!!
कुछ दर्द चले जाते है,
दोस्तो के साथ मुस्कुराने मे…
*******
थका है तन मगर यह दिल हमें सोने नहीं देता,
तुम्हारी पीठ का यह तिल हमें सोने नहीं देता।
*******
बहुत सरल है, किसी को पसंद आना,
कठिन तो है, हमेंशा पसंद बने रहना।
*******
“तुम मुझे अब याद नहीं आते…
तुम मुझे याद हो गये हो अब……!!
*******
आज दिल चाह रहा है
इतना मुस्कुराऊँ कि रोने लग जाऊं.
*******
“खो” देते हैं,
फिर…
“खोजा” करते हैं,
यही खेल हम जिन्दगी भर “खेला” करते हैं. . .
*******
तुम आओ तो
बारिश बुलाऊ
संग तुम्हारे
भीग जाऊ
इतने करीब
आ जाओ
साँसों से
साँसे सुलगाउ
बुँदे उतरेगी
ज़ुल्फ़ों से
शराब समझकर
पि जाऊं
हवाए पूछेंगी
मुझसे कानोंमें
कौनसे बहाने
तुम्हे छू जाऊं !!!
आसिम !!
*******
ऐसा नहीं के परदे के पीछे सिर्फ राज़ होते है
कभी कभी वहां हमराज़ भी होते है !
आसिम !
*******
हवा से कह दो खुद को आज़मा के दिखाये,
बहुत चिराग बुझाती है एक जला के दिखाये।
*******
ये गुलाब को छुट रहा है पसीना,,
क्या उसने भी देखी कोई हसीना ?
*******
वक़्त का काम तो गुज़रना है,
बुरा हो तो सब्र करो,
अच्छा हो तो शुक्र करो।
*******
कमबख़्त ख़यालों ने ज़िन्दा रखा है;
वरना सवालों ने तो कब का मार दिया होता!
*******
क्या बेचकर हम खरीदें “फुर्सत ऐ “जिंदगी
सब कुछ तो “गिरवी”पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।
*******
लब-ए-ख़ामोश का,
सारे जहाँ में बोलबाला है !
वही मेहफ़ूज़ है यहाँ,
जिसकी ज़ुबाँ पे ताला है !!
*******
दर्द बेचता हूँ, मिला के आँसू आह में !
लोग ख़रीद ही लेते है, किसी अपने की चाह है……
*******
लफ्जों का इस्तेमाल हिफाजत से करिये,
ये परवरिश के बेहतरीन सबुत होते है !!
*******
अनुभव एक बेहतरीन स्कूल है,
लेकिन फीस बहुत लेता है।
*******
एक अरसा हो गया मुझे नशा किये यारा…
सोचा क्यों न आज तेरा नाम अपने लबों पे लाया जाये !!
*******
ख्वाहीशों के दाम उँचे हो सकते है मगर,
खुशीयाँ हरगीज महंगी नही होती…
*******
तो क्या हुआ…..
जो दोस्त नहीं मिलते हमसे….
मिला तो रब भी नहीं…
पर इबादत काहां रुकी हमसे..
*******
खामोशी से सुन लो
अपने खिलाफ बाते,
यकीन मानो वक्त,
बेहतरीन जवाब देगा..
*******
इक उम्र तक मैं जिसकी जरुरत बना रहा…
फिर यूँ हुआ कि उस की जरुरत बदल गई।
*******
जब्त कहता है खामोशी से बसर हो जाये,
दर्द की ज़िद है कि दुनिया को खबर हो जाये।
*******
जो दो लफ्जों की हिफाजत न कर पाए,
उनके हाथों में जिंदगी की किताब क्या देता।
*******
अब तक न हुई है , न होगी किसी की ये,
वख्त की सुई है , अपनी मनमानी करेगी ये।
*******
मै ख्वाहिशो मे कैद हूँ….!!
और हकीकतें मेरी सजा है….
इश्क़ का मेरे दोस्त —!!
यही तो मज़ा है…. !!
*******
मै ख्वाहिशो मे कैद हूँ….!!
और हकीकतें मेरी सजा है….!!
*******
जीते जी बुझती नहीं है
प्यास कभी ,
शायद इसीलिए…..
अस्थियां गंगा में बहायी जाती है …….
*******
थोड़ी खुद्दारी भी तो लाज़िम थी,
उसने हाथ छुड़ाया, मैंने छोड़ दिया…..
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कर दिया तूने जिन्दगी को
न लिखने के
काबिल छोड़ा न जलने के…
*******
मै फिर से गिरूंगा ये ग़लतफ़हमी दूर कर लो…
वो दिल की गलती थी की हम लडखडा से गए थे…
*******
आँखें भिगोने लगी है अब तेरी बातें,
काश ..
तुम अजनबी ही रहते तो अच्छा होता..
*******
तुझे शिकायत है कि , मुझे बदल दिया है वक्त ने __ !
कभी खुद से भी तो सवाल कर क्या तू वही है…..?
*******
वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा,
मसला फूल का है फूल किधर जाएगा।
*******
एक ही चेहरे की अहमियत हर एक नजर में अलग सी क्यूँ है,,
उसी चेहरे पर कोई खफा तो कोई फिदा सा क्यूँ है,,,,,,
*******
बहुत मुश्किल से करता हूँ, तेरी यादों का कारोबार…
मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है.!!!
*******
जो न देते थे जवाब , उनके सलाम आने लगे…
वक़्त बदला तो, मेरे नीम पे आम आने लगे…
*******
दिल कर बैठा
बच्चो जैसी ज़िद
तुम सामने हो
तब ही मनाये ईद !!!
आसिम !!
*******
कितना अजीब है ये फलसफा जिंदगी का ;
दूरियां सिखाती है की नज़दीकियां क्या होती हैं ..
*******
कुछ अधूरे ख़्वाबों से सुलह कर लेता हूँ,
बस इस तरह रात से सुबह कर लेता हूँ।
*******
नींद भी नीलाम हो जाती हैं दिलों की महफ़िल में जनाब,
किसी को भूल कर सो जाना इतना आसान नहीं होता…
*******
न जाने किसने चलाया ये तोहफे देने का रिवाज़.!
गरीब आदमी मिलने-जुलने से डरता है साहब.!!
*******
हास्य-व्यंग्य की पराकाष्ठा :
तुम तो ऐसे उदास बैठे हो,
जैसे बीबी के पास बैठे हो…।।।
*******
मुझसे झूठ की उम्मीद ना करो
तुम।,
मैं आईना हूं , सबह का अखबार नहीं….
*******
धुंआ दर्द बयाँ करता है,,और राख कहानियां छोड़ जाती है,
कुछ लोगों की बातों में भी दम नही होता,
कुछ लोंगो की खामोशियाँ भी निशानियां छोड़ जाती है।
*******
ख़्वाब रूठे हैं मगर हौसले अभी ज़िंदा हैं…
हम वो शख्स हैं जिससे मुश्किलें भी शर्मिंदा हैं।
*******
चख लिया इश्क, इत्तेफाक से जिसने,
जुबां पर आज भी उनके दर्द के छाले है…
*******
वो इक मज़ाक़ जिसे लोग इश्क़ कहते हैं…
मैं उस मज़ाक़ का जुर्माना भर के आया हूँ।
*******
मौसम का ग़ुरूर तो देखो!!!
तुमसे मिल कर आया हो जैसे….
*******
लगता है हम ही अकेले समझदार है,
हर बात हमें ही समझाई जा रही है!!
*******
कुछ अजब हाल है इन दिनों तबियत का…..
ख़ुशी ख़ुशी न लगे और ग़म बुरा न लगे…..
*******
बैठे हैं बड़ी फुरसत से,
तेरी फुरसत के इंतज़ार मे..!!!
*******
जब दिल..
ना लग रहा..
हो कहीं..
तब समझिये..
कि दिल लग..
गया है कहीं..!!
*******
दर्द आँखों से निकला, तो सब ने कहा कायर है ये,
दर्द अल्फ़ाज़ में क्या ढला, सबने कहा शायर है ये।
*******
“अपनी वफ़ा का इतना दावा ना किया कर,
मैंने रूह को जिस्म से बेवफाई करते देखा है !!”
*******
मैंने कुछ लफ़्ज लिखे है लहरों पर,
जब दरिया तेरे शहर से गुजरे पढ़ लेना….
*******
मेरी झोली में कुछ दोस्त और कुछ रिश्ते हैं ,
शुक्र ए मेरे मालिक, उनमे कुछ आप जैसे फ़रिश्ते हैं.!
*******
तुमको मिल ही गया
कोई बेहतर
मुझसे !
मुझको भी मिल गया
कोई बेहतर
तुमसे !
पर कभी कभी दिल को यूँ भी लगता है …
हम जो इक दूसरे को मिल जाते
तो यक़ीनन वो होता बेहतर
सबसे !
*******
कीमतें गिर जाती हैं खुद की अक्सर,
किसी को कीमती बनाने में।
*******
टूटें तो बड़े चुभते हैं…
क्या काँच.. क्या ख़्वाब.. क्या रिश्ते………
*******
रस्म-ए-उल्फत ही इजाज़त नहीं देती वरना…
हम तुम्हें इस तरह भूलें ,
के तुम भी याद करो।
*******
गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों में,
जल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारो में|
*******
ये इत्र की शीशियां बेकार ही इतराती है खुद पर,
रिश्ते तो आप जैसे लोगो से महकते है ….
*******
रुसवाई का डर है… या अंधेरों से मोहब्बत,
अब चाँद को मैं आँगन में उतरने नहीं देता।
*******
आज लफ्जों को मैने शाम की चाय पे बुलाया है,
बन गयी बात तो ग़ज़ल भी हो सकती है..!!
*******
कभी तुम मुझे अपना तो कभी गैर कहते गये,,,,
देखो मेरी नादानी, हम सिर्फ तुम्हे अपना कहते गये…..!
*******
चमचों की फितरत को अभी तू,
समझा ही कहाँ है ऐ बर्तन….
ये बने ही तुझे खाली करने के लिए हैं।
*******
न जाने ज़िन्दगी का, ये कौन सा दौर है,
इंसान खामोश है, और
ऑनलाइन कितना शोर है।
*******
जो-जो बातें पी गया था मैं..
वो सारी बातें खा गयीं मुझे…
*******
यह चादर सुख की मौला क्यों सदा छोटी बनाता है ,
सिरा कोई भी थामो दूसरा कुछ छूट जाता है।
*******
चाहे कसूर किसीका भी हो,
लेकिन रिश्ते में आंसू हमेशा बेकसूर के ही बहते है..!!
*******
तेरी दोस्ती एक नशा है,
तभी तो सारी दुनियां हमसे खफा है,
ना करो हमसे इतनी दोस्ती,
कि दिल हमसे पूछे तेरी धड़कन कहाँ है…
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लफ्ज मै कितने भी खूबसूरत लिख दूँ…
निखार तो तब आता है जब आप दिल से उफ्फ करते है..
*******
जो नहीं है हमारे पास वो ख्वाब हैं,
पर जो है हमारे पास वो लाजवाब हैं…
*******
“ज़िन्दगी’……….”जीनी” है तो “तकलीफ’ तो “होगी” ही…!!
वरना,
“मरने” के बाद तो “जलने” का भी “एहसास” नहीं होता साहब…!!
*******
“ना राख उड़ती है ….. ना धुआँ उठता है….
कुछ रिश्ते यूँ चुपचाप जला करते हैं…!!!
*******
हर मर्ज़ का इलाज नहीं दवाखाने में…!!
कुछ दर्द चले जाते है,
दोस्तो के साथ मुस्कुराने मे…
*******
थका है तन मगर यह दिल हमें सोने नहीं देता,
तुम्हारी पीठ का यह तिल हमें सोने नहीं देता।
*******
बहुत सरल है, किसी को पसंद आना,
कठिन तो है, हमेंशा पसंद बने रहना।
*******
“तुम मुझे अब याद नहीं आते…
तुम मुझे याद हो गये हो अब……!!
*******
आज दिल चाह रहा है
इतना मुस्कुराऊँ कि रोने लग जाऊं.
*******
“खो” देते हैं,
फिर…
“खोजा” करते हैं,
यही खेल हम जिन्दगी भर “खेला” करते हैं. . .
*******
तुम आओ तो
बारिश बुलाऊ
संग तुम्हारे
भीग जाऊ
इतने करीब
आ जाओ
साँसों से
साँसे सुलगाउ
बुँदे उतरेगी
ज़ुल्फ़ों से
शराब समझकर
पि जाऊं
हवाए पूछेंगी
मुझसे कानोंमें
कौनसे बहाने
तुम्हे छू जाऊं !!!
आसिम !!
*******
ऐसा नहीं के परदे के पीछे सिर्फ राज़ होते है
कभी कभी वहां हमराज़ भी होते है !
आसिम !
*******
हवा से कह दो खुद को आज़मा के दिखाये,
बहुत चिराग बुझाती है एक जला के दिखाये।
*******
ये गुलाब को छुट रहा है पसीना,,
क्या उसने भी देखी कोई हसीना ?
*******
वक़्त का काम तो गुज़रना है,
बुरा हो तो सब्र करो,
अच्छा हो तो शुक्र करो।
*******
कमबख़्त ख़यालों ने ज़िन्दा रखा है;
वरना सवालों ने तो कब का मार दिया होता!
*******
क्या बेचकर हम खरीदें “फुर्सत ऐ “जिंदगी
सब कुछ तो “गिरवी”पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।
*******
लब-ए-ख़ामोश का,
सारे जहाँ में बोलबाला है !
वही मेहफ़ूज़ है यहाँ,
जिसकी ज़ुबाँ पे ताला है !!
*******
दर्द बेचता हूँ, मिला के आँसू आह में !
लोग ख़रीद ही लेते है, किसी अपने की चाह है……
*******
लफ्जों का इस्तेमाल हिफाजत से करिये,
ये परवरिश के बेहतरीन सबुत होते है !!
*******
अनुभव एक बेहतरीन स्कूल है,
लेकिन फीस बहुत लेता है।
*******
एक अरसा हो गया मुझे नशा किये यारा…
सोचा क्यों न आज तेरा नाम अपने लबों पे लाया जाये !!
*******
ख्वाहीशों के दाम उँचे हो सकते है मगर,
खुशीयाँ हरगीज महंगी नही होती…
*******
तो क्या हुआ…..
जो दोस्त नहीं मिलते हमसे….
मिला तो रब भी नहीं…
पर इबादत काहां रुकी हमसे..
*******
खामोशी से सुन लो
अपने खिलाफ बाते,
यकीन मानो वक्त,
बेहतरीन जवाब देगा..
*******
इक उम्र तक मैं जिसकी जरुरत बना रहा…
फिर यूँ हुआ कि उस की जरुरत बदल गई।
*******
जब्त कहता है खामोशी से बसर हो जाये,
दर्द की ज़िद है कि दुनिया को खबर हो जाये।
*******
जो दो लफ्जों की हिफाजत न कर पाए,
उनके हाथों में जिंदगी की किताब क्या देता।
*******
अब तक न हुई है , न होगी किसी की ये,
वख्त की सुई है , अपनी मनमानी करेगी ये।
*******
मै ख्वाहिशो मे कैद हूँ….!!
और हकीकतें मेरी सजा है….
इश्क़ का मेरे दोस्त —!!
यही तो मज़ा है…. !!
*******
मै ख्वाहिशो मे कैद हूँ….!!
और हकीकतें मेरी सजा है….!!
*******
जीते जी बुझती नहीं है
प्यास कभी ,
शायद इसीलिए…..
अस्थियां गंगा में बहायी जाती है …….
*******
थोड़ी खुद्दारी भी तो लाज़िम थी,
उसने हाथ छुड़ाया, मैंने छोड़ दिया…..
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