आँसू वो खामोश दुआ है..
जो सिर्फ़ खुदा ही सुन सकता है..!!
*******
फूल और दिल एक से हैं,
तकलीफ दो, तो मुरझा जाते हैं…
*******
चांद अगर पूरा चमके तो उसके दाग़ खटकते हैं,
एक न एक बुराई तय है सारे इज़्ज़तदारों में…..
*******
हमें…अच्छा नहीं लगता….
तुम्हें अच्छा लगे कोई…
*******
ख़ुद्दारी वजह रही कि ज़माने को कभी हज़म नहीं हुए हम,
पर ख़ुद की नज़रों में, यकीं मानो, कभी कम नहीं हुए हम!
*******
ख़ामोशी का अपना मज़ा है,
पेड़ों की जड़े फड़फड़ाया नहीं करतीं..।
*******
ऐसा लगता है नाराज़गी बाक़ी है अभी…
हाथ थामा है मगर दबाया नहीं उसने..
*******
वक़्त का सितम तो देखिए…
खुद गुज़र गया …हमें वहीं छोड़ कर…
*******
फ़ुरसत अगर मिले तुम्हे, तो कभी मुझे भी पढ़ना ज़रुर,
मैं नायाब उलझनों की मुक्कमल किताब हुँ।
*******
मैं ने भी देखने की हद कर दी..
वो तस्वीर से निकल आई..!!
*******
मेरे शब्दों की उम्र बस इतनी
तेरी नज़रों से शुरू …तेरी मुस्कान पे खत्म..
*******
खुद से नहीं हारें
तो अवश्य जीतेंगे
*******
रात तकती रही आंखों में , दिल आरजू करता रहा ,
कोई बे सबब रोता रहा , कोई बे खबर सोता रहा ….!!
*******
सब कहते है
रात हो तो नींद आती है
सब की बातें छोडो
मेरी कहाँ चली जाती है !
शब्बा खैर
आसिम !!!
*******
शोहरतें बदल देती हैं रिश्तों के मायने…
मुकद्दर किसी को इतना भी मशहूर ना करे.
*******
बहुत ख़ास हैं वो लोग
इस दुनिया में….
जो वक़्त आने पर,
वक़्त दिया करते हैं…
*******
संभल के चलने का सारा ग़ुरूर टूट गया…
कुछ ऐसी बात कही उसने लड़खड़ाते हुए…
*******
किसके लिए जन्नत बनाई है तूने ऐ खुदा
कौन है इस जहाँ में जो गुनाहगार नहीं है
*******
शरारतें करने का मन अभी भी करता है, ….
पता नहीं बचपना जिंदा है या अधुरा है!! …..
*******
दिल की बातें खुल जाएंगी…
कोई सही चाबी तो लगाए..
*******
एक ऐसी सुबह होनी चाहिए
मेरी ग़ज़लें
और तेरी ज़ुबाँ होनी चाहिए !!
आसिम !!
*******
मेरे ऐबों को तलाशना बंद कर दिया है लोगों ने,
मैंने तोहफ़े में उन्हें जब से आईना दे दिया है…
*******
या तो खरीद लो ….. या खारिज़ कर दो मुझे,
यूँ सहूलियत के हिसाब से, किराये पर मत लिया करो मुझे…
*******
आवाज़ ! फूंक के मिजाजःपर इतराती हे ,
वरना, बांसुरी तो बहुत सस्ती मिलती है .।।
*******
सुना है अब अपनी मर्ज़ी से मरा जा सकता है ..
जिया भी जा सकता तो कितना अच्छा होता…
*******
मोहब्बत से गुज़रा हूँ
अब मयख़ाने में जाना है,
दोनों का असर एक ही है,
बस होश ही तो गंवाना है.
*******
बचपन कि ख्वाहिशें आज भी “खत” लिखती हैं मुझे…….,
शायद बेखबर इस बात से हैं की
वो जिंदगी अब इस “पते” पर नही रहती।
*******
बिन धागे की सुई सी बन गई है ये ज़िंदगी…….
सिलती कुछ नहीं……..
बस चुभती चली जा रही है….
*******
हसरत पूरी ना हों तो ना सही….
ख्वाहिश करना कोई गुनाह तो नहीं….!!
*******
जाने कैसे गुज़ार दी मैंने
ज़िंदा होता , तो मर गया होता
*******
वक्त-वक्त की बात है…
कल जो रंग थे,
आज दाग हो गये।
*******
जिस्म आया किसी के हिस्से में ….
दिल किसी और की अमानत है ….
*******
मेरे आईने में तुम दीखते हो
कभी ले जाकर तसल्ली कर लेना !!
आसिम !!
*******
ज़िन्दगी सारी उम्र संभलती रही दो पाँव पर…
मौत ने आते ही कहा.. मुझे चार कँधे चाहिए…
*******
एक ज़ख्म नहीं यहाँ तो सारा वजूद ही ज़ख्मी है,
दर्द भी हैरान है की उठूँ तो कहाँ से उठूँ !!
*******
खुद पुकारेगी मंज़िल तो ठहर जाऊँगा…
वरना मुसाफिर खुद्दार हूँ, यूँ ही गुज़र जाऊँगा…।
*******
बड़ी होशियारी से मैंने ये भी पाप किया…
कि पाप के घड़े में ही छेद कर दिया…
*******
कौन कहता है के तन्हाईयाँ अच्छी नहीं होती…
बड़ा हसीन मौका देती है ये ख़ुद से मिलने का…
*******
रास्ता इक नया बनाता हूँ…
जब कोई रास्ता नहीं देता…
*******
बिना बुलाए आ जाता है कोई सवाल ही नही करता…
ये तेरा ख्याल भी… मेरा ख्याल नही करता… !!!
*******
डरते हैं तुमसे….. कुछ कहने से……
और रोज मरते हैं ….ना कहने से…
*******
तुम अपने ज़ुल्म की इन्तेहा कर दो,…
फिर तुम्हें शायद कोई
हम सा बेज़ुबाँ मिले ना मिले…
*******
ये कश्मकश है ज़िंदगी की…कि कैसे बसर करें ……
चादर बड़ी करें या …ख़्वाहिशे दफ़न करे…..
*******
उनका इल्ज़ाम लगाने का अन्दाज़ इतना गज़ब था…..
कि हमने खुद अपने ही ख़िलाफ गवाही दे दी ..!
*******
न चादर बड़ी कीजिये,
न ख्वाहिशें दफन कीजिये,
चार दिन की ज़िन्दगी है,
बस चैन से बसर कीजिये…
न परेशान किसी को कीजिये,
न हैरान किसी को कीजिये,
कोई लाख गलत भी बोले,
बस मुस्कुरा कर छोड़ दीजिये…
न रूठा किसी से कीजिये,
न रूठा किसी को रहने दीजिए,
कुछ फुरसत के पल निकालिये,
कभी खुद से भी मिला कीजिये…
*******
दुआ करो, मैं कोई रास्ता निकाल सकूँ..
तुम्हें भी देख सकूँ, खुद को भी सम्भाल सकूँ…
*******
आईने से इतना मुंह चुराते हो
रूह से थोड़ा संवर क्यों नही जाते..
*******
तमाम गिले-शिकवे भुला कर सोया करो यारो….
सुना है मौत किसी को मुलाक़ात का मौका नही देती…
*******
रिश्ते काँच सरीख़े हैं,
टूट कर बिखर ही जाते हैं…
समेटने की ज़हमत कौन करे,
लोग काँच ही नया ले आते हैं…
*******
इश्क़ इक ख़तरा है मेरे दोस्तो,
और मुझे लगता है मेैं ख़तरे में हूं…
*******
इश्क़ में ये दावा तो नहीं है मैं ही अव्वल आऊंगा
लेकिन इतना कह सकता हूं अच्छे नम्बर लाऊंगा
*******
जाती सर्दियां
आती गर्मियां
एक मौसम
रहता है
तेरे मेरे
दरमियाँ !!
-आसिम
*******
सांस के साथ
अकेला चल रहा था..
सांस गई तो
सब साथ चल रहे थे
*******
मुद्दतें लगीं बुनने में ख्वाब का स्वैटर..
तैयार हुआ तो मौसम बदल चुका था।
*******
लिखो तो कुछ इस तरहा कि..
पन्नों पर नाम और
दिल में जगह बरकरार रहे!!
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महफ़िल लगी थी बद-दुआओं की,
हमने भी दिल में कहा !
उसे इश्क़ हो…..उसे इश्क़ हो…. उसे इश्क़ हो……..!!
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जो सिर्फ़ खुदा ही सुन सकता है..!!
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फूल और दिल एक से हैं,
तकलीफ दो, तो मुरझा जाते हैं…
*******
चांद अगर पूरा चमके तो उसके दाग़ खटकते हैं,
एक न एक बुराई तय है सारे इज़्ज़तदारों में…..
*******
हमें…अच्छा नहीं लगता….
तुम्हें अच्छा लगे कोई…
*******
ख़ुद्दारी वजह रही कि ज़माने को कभी हज़म नहीं हुए हम,
पर ख़ुद की नज़रों में, यकीं मानो, कभी कम नहीं हुए हम!
*******
ख़ामोशी का अपना मज़ा है,
पेड़ों की जड़े फड़फड़ाया नहीं करतीं..।
*******
ऐसा लगता है नाराज़गी बाक़ी है अभी…
हाथ थामा है मगर दबाया नहीं उसने..
*******
वक़्त का सितम तो देखिए…
खुद गुज़र गया …हमें वहीं छोड़ कर…
*******
फ़ुरसत अगर मिले तुम्हे, तो कभी मुझे भी पढ़ना ज़रुर,
मैं नायाब उलझनों की मुक्कमल किताब हुँ।
*******
मैं ने भी देखने की हद कर दी..
वो तस्वीर से निकल आई..!!
*******
मेरे शब्दों की उम्र बस इतनी
तेरी नज़रों से शुरू …तेरी मुस्कान पे खत्म..
*******
खुद से नहीं हारें
तो अवश्य जीतेंगे
*******
रात तकती रही आंखों में , दिल आरजू करता रहा ,
कोई बे सबब रोता रहा , कोई बे खबर सोता रहा ….!!
*******
सब कहते है
रात हो तो नींद आती है
सब की बातें छोडो
मेरी कहाँ चली जाती है !
शब्बा खैर
आसिम !!!
*******
शोहरतें बदल देती हैं रिश्तों के मायने…
मुकद्दर किसी को इतना भी मशहूर ना करे.
*******
बहुत ख़ास हैं वो लोग
इस दुनिया में….
जो वक़्त आने पर,
वक़्त दिया करते हैं…
*******
संभल के चलने का सारा ग़ुरूर टूट गया…
कुछ ऐसी बात कही उसने लड़खड़ाते हुए…
*******
किसके लिए जन्नत बनाई है तूने ऐ खुदा
कौन है इस जहाँ में जो गुनाहगार नहीं है
*******
शरारतें करने का मन अभी भी करता है, ….
पता नहीं बचपना जिंदा है या अधुरा है!! …..
*******
दिल की बातें खुल जाएंगी…
कोई सही चाबी तो लगाए..
*******
एक ऐसी सुबह होनी चाहिए
मेरी ग़ज़लें
और तेरी ज़ुबाँ होनी चाहिए !!
आसिम !!
*******
मेरे ऐबों को तलाशना बंद कर दिया है लोगों ने,
मैंने तोहफ़े में उन्हें जब से आईना दे दिया है…
*******
या तो खरीद लो ….. या खारिज़ कर दो मुझे,
यूँ सहूलियत के हिसाब से, किराये पर मत लिया करो मुझे…
*******
आवाज़ ! फूंक के मिजाजःपर इतराती हे ,
वरना, बांसुरी तो बहुत सस्ती मिलती है .।।
*******
सुना है अब अपनी मर्ज़ी से मरा जा सकता है ..
जिया भी जा सकता तो कितना अच्छा होता…
*******
मोहब्बत से गुज़रा हूँ
अब मयख़ाने में जाना है,
दोनों का असर एक ही है,
बस होश ही तो गंवाना है.
*******
बचपन कि ख्वाहिशें आज भी “खत” लिखती हैं मुझे…….,
शायद बेखबर इस बात से हैं की
वो जिंदगी अब इस “पते” पर नही रहती।
*******
बिन धागे की सुई सी बन गई है ये ज़िंदगी…….
सिलती कुछ नहीं……..
बस चुभती चली जा रही है….
*******
हसरत पूरी ना हों तो ना सही….
ख्वाहिश करना कोई गुनाह तो नहीं….!!
*******
जाने कैसे गुज़ार दी मैंने
ज़िंदा होता , तो मर गया होता
*******
वक्त-वक्त की बात है…
कल जो रंग थे,
आज दाग हो गये।
*******
जिस्म आया किसी के हिस्से में ….
दिल किसी और की अमानत है ….
*******
मेरे आईने में तुम दीखते हो
कभी ले जाकर तसल्ली कर लेना !!
आसिम !!
*******
ज़िन्दगी सारी उम्र संभलती रही दो पाँव पर…
मौत ने आते ही कहा.. मुझे चार कँधे चाहिए…
*******
एक ज़ख्म नहीं यहाँ तो सारा वजूद ही ज़ख्मी है,
दर्द भी हैरान है की उठूँ तो कहाँ से उठूँ !!
*******
खुद पुकारेगी मंज़िल तो ठहर जाऊँगा…
वरना मुसाफिर खुद्दार हूँ, यूँ ही गुज़र जाऊँगा…।
*******
बड़ी होशियारी से मैंने ये भी पाप किया…
कि पाप के घड़े में ही छेद कर दिया…
*******
कौन कहता है के तन्हाईयाँ अच्छी नहीं होती…
बड़ा हसीन मौका देती है ये ख़ुद से मिलने का…
*******
रास्ता इक नया बनाता हूँ…
जब कोई रास्ता नहीं देता…
*******
बिना बुलाए आ जाता है कोई सवाल ही नही करता…
ये तेरा ख्याल भी… मेरा ख्याल नही करता… !!!
*******
डरते हैं तुमसे….. कुछ कहने से……
और रोज मरते हैं ….ना कहने से…
*******
तुम अपने ज़ुल्म की इन्तेहा कर दो,…
फिर तुम्हें शायद कोई
हम सा बेज़ुबाँ मिले ना मिले…
*******
ये कश्मकश है ज़िंदगी की…कि कैसे बसर करें ……
चादर बड़ी करें या …ख़्वाहिशे दफ़न करे…..
*******
उनका इल्ज़ाम लगाने का अन्दाज़ इतना गज़ब था…..
कि हमने खुद अपने ही ख़िलाफ गवाही दे दी ..!
*******
न चादर बड़ी कीजिये,
न ख्वाहिशें दफन कीजिये,
चार दिन की ज़िन्दगी है,
बस चैन से बसर कीजिये…
न परेशान किसी को कीजिये,
न हैरान किसी को कीजिये,
कोई लाख गलत भी बोले,
बस मुस्कुरा कर छोड़ दीजिये…
न रूठा किसी से कीजिये,
न रूठा किसी को रहने दीजिए,
कुछ फुरसत के पल निकालिये,
कभी खुद से भी मिला कीजिये…
*******
दुआ करो, मैं कोई रास्ता निकाल सकूँ..
तुम्हें भी देख सकूँ, खुद को भी सम्भाल सकूँ…
*******
आईने से इतना मुंह चुराते हो
रूह से थोड़ा संवर क्यों नही जाते..
*******
तमाम गिले-शिकवे भुला कर सोया करो यारो….
सुना है मौत किसी को मुलाक़ात का मौका नही देती…
*******
रिश्ते काँच सरीख़े हैं,
टूट कर बिखर ही जाते हैं…
समेटने की ज़हमत कौन करे,
लोग काँच ही नया ले आते हैं…
*******
इश्क़ इक ख़तरा है मेरे दोस्तो,
और मुझे लगता है मेैं ख़तरे में हूं…
*******
इश्क़ में ये दावा तो नहीं है मैं ही अव्वल आऊंगा
लेकिन इतना कह सकता हूं अच्छे नम्बर लाऊंगा
*******
जाती सर्दियां
आती गर्मियां
एक मौसम
रहता है
तेरे मेरे
दरमियाँ !!
-आसिम
*******
सांस के साथ
अकेला चल रहा था..
सांस गई तो
सब साथ चल रहे थे
*******
मुद्दतें लगीं बुनने में ख्वाब का स्वैटर..
तैयार हुआ तो मौसम बदल चुका था।
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लिखो तो कुछ इस तरहा कि..
पन्नों पर नाम और
दिल में जगह बरकरार रहे!!
*******
महफ़िल लगी थी बद-दुआओं की,
हमने भी दिल में कहा !
उसे इश्क़ हो…..उसे इश्क़ हो…. उसे इश्क़ हो……..!!
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